पेट के अच्छे बैक्टीरिया: आंत की सेहत का असली राज़

📋यह लेख नीचे दिए गए sources के आधार पर तैयार किया गया है। यह जानकारी शैक्षणिक है — निदान या इलाज के लिए डॉक्टर से मिलें।

हमारी आंत में खरबों की संख्या में छोटे-छोटे जीव रहते हैं — इन्हें मिलाकर "गट माइक्रोबायोम" कहते हैं। ये सिर्फ़ बैठे नहीं रहते; खाना पचाने, विटामिन बनाने और बीमारियों से लड़ने वाले तंत्र को संभालने में इनका बड़ा हाथ है। इनका संतुलन बिगड़े तो पेट की छोटी-छोटी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

ये बैक्टीरिया करते क्या हैं

ये हमारे खाने के रेशे (fiber) को तोड़कर ऐसे तत्व बनाते हैं जिनसे आंत की दीवार मज़बूत रहती है। कुछ विटामिन, जैसे विटामिन K और कुछ B विटामिन, बनाने में भी ये मदद करते हैं। आंत के अच्छे बैक्टीरिया खराब जीवाणुओं को जगह नहीं देते और शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को प्रशिक्षित रखने में भागीदार होते हैं। सरल शब्दों में — आधी पाचन-शक्ति हमारी, आधी इनकी।

संतुलन बिगड़ता क्यों है

बार-बार और बिना ज़रूरत एंटीबायोटिक खाना इन अच्छे बैक्टीरिया को भी मार देता है। बहुत ज़्यादा मीठा, मैदा और पैकेटबंद खाना, नींद की कमी और लगातार तनाव भी संतुलन बिगाड़ते हैं। एंटीबायोटिक ज़रूरी हो तो डॉक्टर के कहने पर पूरी लें, पर दस्त या वायरल बुखार में खुद से एंटीबायोटिक शुरू करना पेट के लिए नुकसानदेह हो सकता है। दवा पूरी करने के बाद कुछ हफ्ते खाने-पीने का ध्यान रखने से संतुलन लौट आता है।

दही, छाछ और खमीर वाले खाने

दही, छाछ, घर का बना अचार, इडली-डोसा का घोल और काँजी जैसे खमीर उठाकर बने खाने हमारे यहाँ सदियों से खाए जाते हैं। इनमें जीवित अच्छे बैक्टीरिया होते हैं और ये पेट के लिए सहायक माने जाते हैं। बाज़ार की महंगी "प्रोबायोटिक" चीज़ों से पहले घर के ये सादे खाने ज़्यादा काम के हैं। रोज़ के खाने में दही या छाछ रखना एक आसान शुरुआत है — बशर्ते दूध आपको सूट करता हो।

बैक्टीरिया को खाना भी चाहिए

अच्छे बैक्टीरिया रेशेदार खाने पर जीते हैं — सब्ज़ियाँ, फल, दालें, छिलके वाला अनाज, केला, जई। जितनी तरह-तरह की सब्ज़ियाँ और दालें थाली में होंगी, उतनी ही विविधता आंत में बनेगी। एक ही तरह का खाना हफ्तों खाते रहना इस विविधता को घटाता है। हफ्ते में अलग-अलग दालें, सब्ज़ियाँ और अनाज घुमाकर खाना इस हिसाब से भी समझदारी है।

डॉक्टर को कब दिखाएं

  • एंटीबायोटिक के बाद दस्त शुरू हो और रुके नहीं, या मल में खून आए
  • बार-बार पेट का संक्रमण होता हो
  • पेट की तकलीफ़ के साथ वज़न घटे या बुखार बना रहे
  • कोई भी प्रोबायोटिक दवा बच्चे, गर्भवती महिला या कमज़ोर रोग-प्रतिरोध वाले व्यक्ति को बिना डॉक्टर की सलाह के न दें

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