विटामिन B12 की कमी: शाकाहारियों में छुपी थकान की वजह
विटामिन B12 खून बनाने और नसों (nerves) की सेहत के लिए ज़रूरी है। यह मुख्य रूप से दूध, दही, अंडे और मांस से मिलता है — इसलिए शुद्ध शाकाहारी परिवारों में इसकी कमी बहुत आम है, और कई बार सालों तक पकड़ में नहीं आती। शरीर इसे जिगर में जमा रखता है, इसलिए कमी धीरे-धीरे, चुपचाप बनती है।
लक्षण: थकान से झुनझुनी तक
शुरुआत में लक्षण हल्के होते हैं — थकान, कमज़ोरी, काम में मन न लगना। कमी बढ़े तो हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन, जीभ में जलन या छाले, मुँह के कोनों का फटना और भूलने की शिकायत आने लगती है। खून की कमी (anemia) भी साथ हो सकती है, जिसमें त्वचा पीली और साँस फूलती है। बुज़ुर्गों में B12 की कमी का असर याददाश्त पर साफ दिखता है और इसे अक्सर सिर्फ़ "उम्र का असर" समझ लिया जाता है।
शाकाहारियों में कमी क्यों आम है
पौधों से बने खाने में B12 लगभग नहीं होता। दूध-दही खाने वाले शाकाहारियों को कुछ मात्रा मिलती है, पर वह भी अक्सर ज़रूरत से कम पड़ती है — खासकर जब दूध की मात्रा कम हो। कुछ खाद्य पदार्थ B12 मिलाकर (fortified) बेचे जाते हैं, जैसे कुछ सोया दूध और नाश्ते के सीरियल — पैकेट पर लिखा देखकर ही भरोसा करें। पेट की एसिडिटी की दवा लंबे समय लेने वालों और पेट के ऑपरेशन वालों में भी B12 सोखना घट जाता है, चाहे खाना ठीक हो।
जाँच कैसे होती है
खून की Serum Vitamin B12 जाँच से स्तर पता चलता है। कभी-कभी स्तर "किनारे पर" आता है और लक्षण मौजूद होते हैं — ऐसी स्थिति में डॉक्टर कभी-कभी homocysteine या MMA जैसी अतिरिक्त जाँच की सलाह देते हैं। रिपोर्ट के नंबर को लक्षणों के साथ जोड़कर डॉक्टर ही नतीजा निकालते हैं। थकान और झुनझुनी जैसे लक्षण हों और आप शाकाहारी हों, तो डॉक्टर से मिलते समय B12 जाँच का ज़िक्र ज़रूर करें — कई बार यह जाँच पहली सूची में छूट जाती है।
पूर्ति का सही तरीका
कमी की पूर्ति खाने में सुधार और ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट या इंजेक्शन से होती है — किसे क्या चाहिए, यह कमी की गहराई और सोखने की क्षमता पर निर्भर है, इसलिए खुराक खुद तय न करें। नसों के लक्षण आ चुके हों तो देर करना ठीक नहीं, क्योंकि लंबी कमी से नसों का नुकसान कुछ हद तक स्थायी हो सकता है। खाने में दूध-दही नियमित रखें और शुद्ध शाकाहारी (vegan) हों तो fortified खाने या सलाह से सप्लीमेंट की योजना पहले से बनाएं।
डॉक्टर को कब दिखाएं
- हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन लगातार बना रहे
- चलने में लड़खड़ाहट, या याददाश्त साफ़ तौर पर घट रही हो
- जीभ में बार-बार जलन-छाले और मुँह के कोने फटते हों
- शुद्ध शाकाहारी हों और थकान-भूलना महीनों से चल रहा हो — जाँच कराएं
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