कैल्शियम की कमी: हड्डियों की खामोश कमज़ोरी
शरीर का 99% कैल्शियम हड्डियों और दाँतों में जमा रहता है — यह एक तरह का बैंक है। खाने से कैल्शियम कम मिले तो शरीर खून का स्तर ठीक रखने के लिए हड्डियों से निकालने लगता है। जमा-पूँजी घटती रहती है और पता तब चलता है जब हड्डी कमज़ोर होकर टूटती है या जाँच में दिखती है।
कमी धीरे-धीरे क्यों बनती है
भारतीय थाली में अक्सर कैल्शियम की मात्रा रोज़ की ज़रूरत से कम रह जाती है — दूध-दही कम, और रागी-बाजरा जैसे पारंपरिक अनाज थाली से गायब होते जा रहे हैं। बढ़ती उम्र में शरीर का सोखना भी घटता है, और महिलाओं में माहवारी बंद होने के बाद हड्डियों से कैल्शियम निकलना तेज़ हो जाता है। विटामिन D की कमी हो तो खाने का कैल्शियम भी ठीक से नहीं चढ़ता — दोनों कमियाँ अक्सर साथ चलती हैं।
संकेत और हड्डियों की जाँच
कैल्शियम की कमी के शुरुआती संकेत स्पष्ट नहीं होते। मांसपेशियों में ऐंठन, उंगलियों में झुनझुनी, नाखून टूटना जैसे लक्षण आ सकते हैं, पर असली तस्वीर हड्डियों की मज़बूती से पता चलती है। ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर DEXA स्कैन से हड्डियों का घनत्व (bone density) जाँचने की सलाह देते हैं, खासकर 50 की उम्र के बाद की महिलाओं और मामूली चोट से फ्रैक्चर वालों में। खून की कैल्शियम जाँच सामान्य आना हड्डियाँ ठीक होने का सबूत नहीं है — खून का स्तर शरीर हड्डियों की कीमत पर भी सामान्य रखता है।
दूध के अलावा कैल्शियम कहाँ है
दही, पनीर और दूध अच्छे स्रोत हैं, पर सूची यहीं खत्म नहीं होती। रागी (मंडुआ) कैल्शियम का बहुत समृद्ध भारतीय स्रोत है। तिल, बादाम, सोया और सोया-दूध, चना, और हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ भी योगदान देती हैं। छोटे कांटों समेत खाई जाने वाली छोटी मछलियाँ मांसाहारियों के लिए मज़बूत स्रोत हैं। दिन भर के खाने में दो-तीन स्रोत घुमा-फिराकर रखें — एक ही चीज़ पर निर्भर न रहें। कुछ सब्ज़ियों का कैल्शियम धीरे घुलता है, इसलिए विविधता ही काम आती है।
हड्डियाँ सिर्फ़ कैल्शियम से नहीं बनतीं
हड्डी को कैल्शियम के साथ विटामिन D, प्रोटीन और भार पड़ने वाली कसरत भी चाहिए — पैदल चलना, सीढ़ियाँ, हल्का वज़न वाला व्यायाम। धूम्रपान और ज़्यादा शराब हड्डियाँ कमज़ोर करती हैं। कैल्शियम की गोली हर किसी के लिए ज़रूरी नहीं होती; बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक लेने से कुछ लोगों में पथरी जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। पहले खाना सुधारें, कमी का शक हो तो जाँच और सलाह लें।
डॉक्टर को कब दिखाएं
- मामूली गिरने या ठोकर से हड्डी टूट जाए
- उम्र के साथ कद घटता लगे या पीठ झुकने लगे
- लगातार मांसपेशियों की ऐंठन, होंठ-उंगलियों में झुनझुनी हो
- 50 की उम्र के बाद की महिलाएँ और लंबे समय से स्टेरॉयड लेने वाले — हड्डी जाँच पर डॉक्टर से बात करें
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